अलविदा — अभिनेता धर्मेंद्र जी: सिनेमा जगत के एक चमकते सितारे को भावपूर्ण श्रद्धांजलि
1. परिचय
24 नवंबर 2025 की सुबह, मुंबई के जुहू स्थित अपने घर में, ही-मैन कहे जाने वाले दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र जी ने 89 वर्ष की आयु में अपनी अंतिम सांस ली। उनकी मृत्यु ने न केवल परिवार और प्रशंसकों में शोक लाया, बल्कि हिंदी सिनेमा के लिए एक युग का अंत भी चिन्हित किया। “गरम धरम”, “वीरू” और “विरेंदर” जैसे नामों ने उन्हें सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि एक पहचान बना दिया था — और उनका जाना ऐसी विरासत छोड़ गया जिसे हम कभी भुला नहीं सकते।
2. अंतिम यात्रा और शोक
धर्मेंद्र जी का पार्थिव शरीर विले पार्ले, पवन हंस श्मशान भूमि में अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया था। इस दुखद घड़ी में उनके परिवार — हेमा मालिनी, सनी देओल, बॉबी देओल, ईशा देओल — और फ़िल्म जगत के दिग्गजों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमिताभ बच्चन, सलमान खान, अनिल कपूर सहित अन्य बड़े नाम वहां मौजूद थे।
देश के शीर्ष नेताओं ने भी धर्मेंद्र जी के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनका जाना “सिनेमा में एक युग के अंत को दर्शाता है”। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें “भारतीय सिनेमा का एक स्तंभ” कहा और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करने वाली बताई।
कलाकारों और निर्देशक करण जौहर ने सोशल मीडिया पर उन्हें “हीरो का embodiment” और “बोनाफाइड लेजेंड” कहा, और उनके अंदर की इंसानियत की बात भी बहुत खूबसूरती से कही।
3. एक सिनेमाई युग का उदय
धर्मेंद्र जी का जन्म 8 दिसंबर 1935 को पंजाब के साहनेवाल में हुआ था। उनकी प्रारंभिक ज़िंदगी साधारण थी — उनके पिता स्कूल हेडमास्टर थे, और धर्मेंद्र ने क्लर्क की नौकरी भी की। लेकिन एक छोटी-सी घटना ने उनका जीवन बदल दिया: उन्होंने सुरैया की फिल्म दिल्लगी देखी, और वहाँ से उनकी अभिनय की ख्वाहिश जगी।
मुंबई आने के बाद उन्होंने संघर्ष भरा सफर तय किया। उनकी शुरुआत दिल भी तेरा हम भी तेरे से हुई, और उन्होंने अनपढ़, बंदिनी जैसी फिल्मों में काम किया। लेकिन वास्तव में पहचान उन्हें 1966 में आई, जब उनकी फूल और पत्थर रिलीज़ हुई।
उनकी शारीरिक उपस्थिति, मस्कुलर शरीर और स्टंट करने की हिम्मत ने उन्हें “ही-मैन” और “एक्शन किंग” की उपाधि दिलाई। वे अक्सर अपने स्टंट खुद करते थे, और उनका चार्म, उनकी ऑन-स्क्रीन ऊर्जा ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
4. प्रमुख फ़िल्मी योगदान एवं विरासत
धर्मेंद्र जी का करियर विविधता और दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ने वाला था:
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ब्लॉकबस्टर माइलस्टोन:
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शोले (वीरू के रूप में): यह उनकी सबसे ikonic भूमिका मानी जाती है।
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चुपके चुपके, सीता और गीता (हेमा मालिनी के साथ), धरम वीर, प्रतिज्ञा — ये उनकी अन्य यादगार फिल्में हैं।
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गंभीर अभिनय:
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बंदिनी, अनुपमा, और विशेष रूप से सत्यकाम — ये फिल्में दर्शाती हैं कि वे सिर्फ एक एक्शन हीरो नहीं थे, बल्कि एक संवेदनशील और गहराई वाले अभिनेता भी थे।
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रोमांटिक और कॉमेडी:
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चुपके चुपके में उनकी कॉमिक टाइमिंग, गुड्डी जैसी फिल्मों में उनकी चुलबुली रोमांटिक छवि बहुत प्रिय रही।
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एक्शन:
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शोले, धरम वीर, प्रतिज्ञा जैसी फिल्मों में उनकी एक्शन अवतार ने उन्हें असाधारण लोकप्रियता दिलाई।
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उनकी पहचान सिर्फ किरदारों तक सीमित नहीं थी — उनके कुछ डायलॉग्स आज भी सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा हैं। “बसंती इन कुत्तों के आगे मत नाचना” जैसा डायलॉग उनकी छवि में खोद गया है, और दर्शकों की जुबां पर आज भी गूंजता है।
5. निजी जीवन और पारिवारिक बंधन
धर्मेंद्र की निजी ज़िंदगी उतनी ही रंगीन और दिलचस्प थी जितना उनका करियर:
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उन्होंने प्रकाश कौर से शादी की, जिनसे उनके बच्चों में सनी देओल, बॉबी देओल, अजीता और विजेता शामिल हैं।
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बाद में, उन्होंने फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी से भी विवाह किया, और उनके दो बच्चे हुए — ईशा देओल और अहाना देओल।
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वे राजनीति में भी सक्रिय रहे: धर्मेंद्र बीकानेर (राजस्थान) से लोकसभा सांसद रह चुके हैं, जहां उन्होंने जनता के बीच वे अपनी सादगी और सीधेपन के लिए जाने जाते थे।
उनकी परवरिश और पारिवारिक समर्थन ने न सिर्फ उनके बच्चों को फिल्मों में आगे बढ़ने का मौका दिया, बल्कि उन्होंने अपने बेटे सनी देओल और बॉबी देओल को बेताब और बरसात जैसी फिल्मों के ज़रिए लॉन्च किया। तीनों (धर्मेंद्र, सनी और बॉबी) ने एक साथ अपनों जैसी फिल्म में भी अभिनय किया।
6. सम्मान एवं पुरस्कार
धर्मेंद्र जी को उनके लंबे और बैलेंस्ड करियर के लिए कई उच्च सम्मान मिले:
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सरकारी सम्मान: उन्हें 2012 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया, जो भारत सरकार की तीसरी सबसे बड़ी नागरिक अवॉर्ड है।
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फिल्मी पुरस्कार: उन्होंने फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड जिता (1997), और कई और प्रतिष्ठित पुरस्कार भी प्राप्त किए।
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सम्मानित उपाधियाँ: 1970-80 के दशक में उन्हें “वर्ल्ड आयरन मैन” जैसी उपाधियाँ मिले, जो उनकी शारीरिक ताकत और एक्शन स्टाइल की पहचान थी।
7. अंतिम निष्कर्ष / श्रद्धांजलि
धर्मेंद्र जी के जाने से न सिर्फ एक अभिनेता खोया है, बल्कि हिंदी सिनेमा ने उस युग के उस हीरो को खो दिया, जिसने मुस्कुराहट, बहादुरी और दिल से जुड़ी कहानियों को हमेशापर यादगार बना दिया। उनकी हर फिल्म, हर किरदार, हर डायलॉग आज भी हमारी स्क्रीन पर उतनी ही चमकता है जितना पहले था।
… भले ही ‘वीरू’ ने आज ‘बसंती’ और करोड़ों प्रशंसकों से अलविदा कह दिया हो, लेकिन उनका हर किरदार, हर डायलॉग हमेशा हिंदी सिनेमा के कैनवास पर सुनहरे अक्षरों में चमकता रहेगा। भावपूर्ण श्रद्धांजलि।



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